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इस दुनिया में दोस्त ढूँढ रहा हूँ। लोकेश शर्मा।

इस दुनिया में दोस्त ढूँढ रहा हूँ। मन अशांत है थोड़ा, इसका वही समाधान खोज रहा हूँ, जो बतलाया गया, दिल खोलने का वही ख्याल जोड रहा हूँ। उन सबकी बात थी, तो उन सबके साथ सदा खड़ा था मैं,  अब जो बारी मेरी आई, तो आने की उनकी राह तक रहा हूँ।  जीवन का एक रिश्ता है, जिनका साथ हो तो सब ठीक है, दोस्ती है वो रिश्ता, दोस्त है रिश्तेदार उनकी बात कर रहा हूँ। कुछ और नहीं बस, दोस्तों के साथ की चाय सोच रहा हूँ, मैं पगला गया हूँ, जो इस दुनिया में वैसे हीं दोस्त ढूँढ रहा हूँ। लोकेश शर्मा।

न जाने क्यों तुमने इसे प्यार करने की ख़्वाहिश की है।। लोकेश शर्मा।

ये दिल शीशे की तरह टूट कर बिखरा हुआ था,  न जाने क्यों तुमने इसे समेटने की कोशिश की है। एक एक टूकड़े को हाथों से उठाकर चोट खाई,  न जाने क्यों तुमने इसे जोड़ने की एहतिमाम की है। इसमें अब पहले जैसी धड़कन नहीं होगी कभी, न जाने क्यों तुमने इसे धड़काने की गुज़ारिश की है। ये जो धड़क भी जाये तो प्यार ना होगा इससे, न जाने क्यों तुमने इसे प्यार करने की ख़्वाहिश की है। ~ लोकेश शर्मा।

पता नहीं क्यों? लोकेश शर्मा I

पता  नहीं  क्यों, अब तेरे साथ बात, वो बात  नहीं  होती। होती थी जो शाम, वो शाम  नहीं  होती। वो छोटी-मोटी मजाक, वो थोड़ी-सी छेड़छाड़। होती थी जो खास, वो मुलाकात  नहीं  होती। जब चोट लगती थी मुझे, तो जान जाती थी तेरी, होती थी जो मेरी फिक्र, वो फिक्र अब नहीं होती। अब तेरी मेरी मंजिल, वो मंजिल नहीं होती। होती थी जो राह एक, वो भी अब एक नहीं होती। कहाँ क्या बदल गया, जो सब कुछ बदल गया। क्यूँ मेरे आने की खुशी, वो बहार अब नहीं होती। पता  नहीं  क्यों... ~ लोकेश शर्माI

आज कुछ लिखने की कोशिश की है मैंने। लोकेश शर्मा।

आज कुछ लिखने की कोशिश की है मैंने, अपनी हालत शब्दों में सरेआम की है मैंने। कुछ अपने आप से, कुछ कलम कागज़ से, कुछ आप से कहने की कोशिश की है मैंने। जो कभी किसी से बयां नहीं कर सका वो, लिख कर हालात खुल कर बात की है मैंने। अंदर ही अंदर बंद था किसी कैद में कब से, उस बंदी दिल की बेड़ियां आज़ाद की है मैंने। सुन सको तो सुनना, समझ सको तो समझना, यहां बहुत कुछ कहने की कोशिश की है मैंने। ~लोकेश शर्मा।

अब जो साथ तू नहीं तो फिर मैं नहीं। लोकेश शर्मा।

  तेरा बीच राह मुझे यूँ छोड़ जाना तेरे लिए खेल है तो फिर खेल वहीं... जितना प्यार किया तेरे लिए शायद कम रहा मेरी तू रही नहीं तो फिर ना सही... मैं तो पूरा का पूरा तेरा ही सिर्फ तेरा ही था तुझे काफी नहीं तो फिर ना सही... तुने तेरी दुनिया एक बार फिर से बदली है वो अब मैं नहीं तो फिर कोई और सही... मेरी दुनिया का तो तुझे पता ही है ना अब जो साथ तू नहीं तो फिर मैं नहीं... ~लोकेश शर्मा ।

एक पंछी अपनी राह तकता। लोकेश शर्मा।

एक पंछी अपनी राह तकता, आ पहुँचा कहीं दूर भटकता। अपनी मंजिल अपना रस्ता, एक ही राग को रटता रटता। पंखों को फैला कर अपनी, आज़ादी में उड़ता फिरता। पल भर के आनंद लालच में, अपना जीवन बर्बाद करता। झूठे थे सब सपने उसके, आनंद था सब झूठा उसका। आवारगी में अब क्या पाया, जो अपनो को था गलत करता। संगी साथी सब अपने छूटे, परायों के साथ चलता चलता। अब जब पराये छोड़ गए, अपनो को बस  है  याद करता। अब पीछे न कोई है उसके, न आगे है कोई और रस्ता। जाए तो वो जाए कहाँ अब, मन मे न अब कुछ समझता। एक पंछी अपनी राह तकता, आ पहुँचा कहीं दूर भटकता। अपनी मंजिल अपना रस्ता, एक ही राग को रटता रटता। ~लोकेश शर्मा।

क्यूँ मान लूँ मैं। लोकेश शर्मा।

क्यूँ मान लूँ मैं। हमारे दरमियाँ कभी , कि कुछ था ही नही , हमने एक दूसरे को , कि कभी चाहा ही नही। तुम भी वाक़िफ़ हो , मैं भी वाक़िफ़ हूँ , ये रिश्ता सच है जिसे , कि तू अब मानता ही नही। प्यार तो था और है भी , मुझे तुमसे , तुम्हें मुझसे। तो क्यूँ झूठ बोलूँ मैं , कि  हम  अब कुछ भी नही। जो तुम्हें पसंद नही , वो बात करेंगें   भी नही। पर झुठला दूँ प्यार को , ऐसा तो हम करेंगें ही नही। टूट कर चाहा हैं हमने , दोनो ही बिखरने लगे है। तो क्यूँ मान लूँ मैं , कि हम अब साथ ही नही। तुम चाहे कह दो हमे , कि तुम अब कुछ भी नही। तो क्यूँ मान लूँ मैं , कि जो कहा वो झूठ ही नही। ~ लोकेश शर्मा।

न फिर कभी। लोकेश शर्मा।

हाँ मेरी कुछ बाते है ऐसी, जो शायद तुम्हे अच्छी न लगे। पर आज न कह सका, तो न कह सकूँगा फिर कभी। तुम जा तो रही हो छोड़कर, रोकूंगा नही तुम्हें अब। पर वादा है मेरा तुमसे, अब न मिलूंगा तुम्हें फिर कभी। चाहे दुख में ही दिन गुजरे, या फिर रो कर कटे रात। न होगा तुम्हारा इंतज़ार, न करूँगा अभिनंदन फिर कभी। जब कभी अकेला लगेगा, तब याद जरूर आएगी। पर साथ देने तुम्हारे, अब न आऊँगा मैं फिर कभी। ~लोकेश शर्मा।

मैं वहीं पर खड़ा तुमको मिल जाऊँगा। डा. विष्णु सक्सेना।

मैं वहीं पर खड़ा तुमको मिल जाऊँगा जिस जगह जाओगे तुम मुझे छोड़ कर। अश्क पी लूँगा और ग़म उठा लूँगा मैं सारी यादों को सो जाऊंगा ओढ़ कर ।। जब भी बारिश की बूंदें भिगोयें तुम्हें सोच लेना की मैं रो रहा हूँ कहीं। जब भी हो जाओ बेचैन ये मानना खोल कर आँख में सो रहा हूँ कहीं। टूट कर कोई केसे बिखरता यहाँ देख लेना कोई आइना तोड़ कर। मैं वहीं पर खड़ा तुमको....... रास्ते मे कोई तुमको पत्थर मिले पूछना कैसे जिन्दा रहे आज तक। वो कहेगा ज़माने ने दी ठोकरें जाने कितने ही ताने सहे आज तक। भूल पाता नहीं उम्रभर दर्द जब कोई जाता है अपनो से मुंह मोड़ कर। मैं वहीं पर खड़ा तुमको...... मैं तो जब जब नदी के किनारे गया मेरा लहरों ने तन तर बतर कर दिया। पार हो जाऊँगा पूरी उम्मीद थी उठती लहरों ने पर मन में डर भर दिया। रेत पर बेठ कर जो बनाया था घर आ गया हूँ उसे आज फिर तोड़ कर। मैं वहीं पर खड़ा तुमको....... ~ डा. विष्णु सक्सेना ।

मेरी नींदें उड़ा कर, वो चैन से सो गई। लोकेश शर्मा।

मेरी नींदें उड़ा कर , वो चैन से सो गई। सब कुछ तो किया था , न जाने कहाँ कमी रह गई। अब तो दिन-रात , सब एक-सी हो गई । रात को बारिश की बूँदें , दिन   में उनकी नमी रह गई। ~लोकेश शर्मा।

तुझे पता है, तू मेरी जान है। लोकेश शर्मा।

तुझे पता है, तू मेरी जान है, तुझे दुखी कैसे रख सकता हूँ। तू अगर खुश रह ले तो मैं, बेजान भी खुश रह सकता हूँ। ~लोकेश शर्मा।

मगर तुझे तो भुला भी नही सकता। लोकेश शर्मा।

खुश रहने की बहुत इच्छा है, मगर खुश रह भी नही सकता। जोर से रोने का मन कर रहा है, मगर खुल कर रो भी नही सकता। तुझ पर बहुत गुस्सा आ रहा है, मगर गुस्सा कर भी नही सकता। बहुत कुछ मुझे बताना है तुझे, मगर अब बता भी नही सकता। मेरा सब कुछ दूर चला गया है, मगर मैं कुछ कर भी नही सकता। मिलने को तो कोई और मिल जाये, मगर तुझे तो भुला भी नही सकता। ~लोकेश शर्मा। Views:

वो तुम नही थी। लोकेश शर्मा।

वो लड़की मुझे दिखी, जो किसी से बात कर रही थी। वो ही काला टॉप और, हल्के ग्रे कलर की जीन्स पहनी थी। बाल थे उसके खुले खुले, मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी। फिर बात खत्म कर वो, उस जगह से आगे चल पड़ी थी। काला छोटा बैग लटका था, और चलने की स्टाइल भी वही थी। ---1--- मैं भी दौड़ने लगा उसके पीछे, मिलूंगा आज उस से, खुशी बड़ी थी। मेरी उत्साहित ज़बान ने उसे, दौड़ते-दौड़ते पीछे आवाज भी दी थी। सुना नही होगा शायद उसने, वो आवाज सुन पीछे नही मुड़ी थी। मैंने हाथ उसका फिर पकड़ा, रोका उसे, वो मेरे सामने खड़ी थी। मैं चेहरा देख चौक गया था, जिसे तुम था समझा, वो तुम नही थी। ---2--- उसने देखा मुझे और फिर, 'क्या हुआ बोलिए' वो सवाल पूछी थी। कोई और समझ लिया आपको, माफ करना मुझे, जो गलती हुई थी। ये कहकर बस देखता रहा, सब कुछ वैसा ही, पर वो तुम नही थी। मिलना था तुमसे दुबारा, ये ख्वाइश न जाने क्यूँ अधूरी थी। फिर मन ही मन में रोता रहा, आखिर क्यों वो जो थी, वो तुम नही थी। 😔😔😔 ---3--- ~लोकेश शर्मा। Thank you Ram Kumar Prajapati, Vandana Sharm...

आखिरी खत, प्यार को।

प्यार,             जानता हूँ, मैं जानता हूँ की काफी समय बीत गया है। काफी समय बीत गया है, हमे एक दुसरे से अलग हुए, पर मैं आज भी उन पुरानी यादों में खोया रहता हूँ। वो यादें जो कभी मेरे जीवन में खुशियों की रोशनी हुआ करती थी, वो आज मुझे कई घंटे उदास रखती है।               क्या तुम खुश हो, मेरे बिना? शायद हो लेकिन मैं नहीं।              कल रात तुम्हारे लिखे हुए पुराने खत पढ़ रहा था, “मैं तुमसे मिलने से पहले तक ये नहीं जानती थी की प्यार क्या होता है? पर अब जानती हूँ। तुम मेरे लिए सब कुछ हो। अगर भगवान भी स्वयं हमे अलग करने की कोशिश करे तो वो भी हमे एक दुसरे से अलग नहीं कर पायेगा।” ऐसी कई बातें है, जो उनमे लिखी थी, आज जिनका कोई अर्थ नहीं है। पता नहीं ये बातें सच भी थी या नहीं, या फिर किसी और के लिए बदल गई है।             वो रात जब हम आखिरी बार मिले थे, वो रात जब मेरा वस्तिकता से सामना हुआ। जब तुमने मुझ ...

पल पल उस पल की याद दिलाता है। लोकेश शर्मा।

पल पल उस पल की याद दिलाता है, जिस पल एक दूसरे को पल भर देखा था। कल कल रोज़ एक कल समय दिखलाता है, न वो कल आता न वो आता दिखता था। क्या क्या करते क्या कुछ हो जाता है,

इधर देखा उधर देखा। लोकेश शर्मा।

इधर देखा उधर देखा, जब देखा जिधर देखा, तुझे रोज़ अपने साथ और रोज़ नया ख्वाब देखा। तेरा मुस्कुराता चेहरा देखा, घनी झुल्फों का घेरा देखा,

Valentines week hindi poem।अगर प्यार दिखा होता उसमे।

अगर प्यार दिखा होता उसमे, तो कई Rose मिलते उसे भी, भर देता फूलों से घर उसका, बेहद प्यार मिलता उसे भी। मैं बीता देता जिंदगी उसके साथ,

अधूरी मुलाकात। लोकेश शर्मा।

बहुत दिनो बाद मुलाकात हुई हमारी, वो एक अधूरी मुलाकात हुई हमारी। इशारो ही इशारो में एक दूसरे को अपने पास बुलाया, आंखों ही आंखों में एक दूसरे को अपना हाल बताया, झूठा ही सही मगर अपना हसता चेहरा दिखाया, कितना दर्द है दिल मे ये किसी ने नही बताया, कुछ बाते इस बार भी हुई हमारी, जो होनी थी बस वही बात नही हुई हमारी,