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इस दुनिया में दोस्त ढूँढ रहा हूँ। लोकेश शर्मा।

इस दुनिया में दोस्त ढूँढ रहा हूँ। मन अशांत है थोड़ा, इसका वही समाधान खोज रहा हूँ, जो बतलाया गया, दिल खोलने का वही ख्याल जोड रहा हूँ। उन सबकी बात थी, तो उन सबके साथ सदा खड़ा था मैं,  अब जो बारी मेरी आई, तो आने की उनकी राह तक रहा हूँ।  जीवन का एक रिश्ता है, जिनका साथ हो तो सब ठीक है, दोस्ती है वो रिश्ता, दोस्त है रिश्तेदार उनकी बात कर रहा हूँ। कुछ और नहीं बस, दोस्तों के साथ की चाय सोच रहा हूँ, मैं पगला गया हूँ, जो इस दुनिया में वैसे हीं दोस्त ढूँढ रहा हूँ। लोकेश शर्मा।

सुनो लडकियों, ये जो तुम हो, तो... लोकेश शर्मा।

सुनो लडकियों... ये जो तुम हो, तो तोड़ लाते है चांद सितारों को भी,  नही तो चांद सितारों तक हम आज भी जाते नही... सुख, दुख, प्यार का भाव, है सभी बात तुम्हीं से,  नही तो इस दुनिया पर दिल की दुनिया बनाते कहीं... खुशी, मेले, त्यौहार और व्रत, है सभी बने तुम्हीं से,  नही तो जिंदगी को जैसे तैसे हम जी पाते कभी... ये जो तुम हो, तो साथ है सदा किसी रूप में तुम्हारा  नही तो हम इतनी हिम्मत आज भी लाते नहीं... तुम हो, हैं हवाओं में खुशबू और प्यार का एहसास,  नदी, पहाड़, फूलों की खूबसूरती और सूरज प्रकाश,  ये दुनिया इसके रंग और रौनक, है रोशन तुम्हीं से,  नही तो ज्ञान ये हमको क्या आज भी आते कभी... ये जो तुम हो, तो मैं और मेरा धन्यवाद हैं तुमको, नही तो, ना सृष्टि रचना और अस्तित्व हमारा कहीं... ~लोकेश शर्मा।

मुझे मेरी जिंदगी हर रोज चाहिए। लोकेश शर्मा।

(माना कीं हम रोज नहीं मिलते, लेकिन जब भी मिलते हैं, मुझे मेरी जिंदगी मिल जाती हैं...) मुझे मेरी जिंदगी हर रोज चाहिए...   ये मेरी तरफ उठती निगाहें, जैसे सुबह की हो पहली किरण... ये हसना तुम्हारा, ये मीठी बातें, जैसे पहाड़ो से झरनों की हो जल तरंग... कभी चुप हो जाना और शर्मा जाना, गालो पर शाम की लालिमा आना... यूँ तेरा जुल्फों को बिखरा देना, दिन को पलभर में रात बना देना... ये धूप, ये छाव और ये रंगीन बहार, कुछ और नहीं है, सब है तेरे मिजाज़... ये रात, ये सूरज, ये चाँद और चाँदनी, कुछ और नहीं है, सब है तेरे प्रभाग... ये हवा, ये बारिश, फूल और खुशबु, क्या कुछ नहीं है जो तुझमें समाया... ये मौसम, ये धरती, आसमाँ खूब नहीं,  कि रब ने तुझे क्या बखूब है बनाया... सबके पास दुनिया खूब है, सही है, पर मुझे मेरी दुनिया बखूब चाहिए... मेरा तुम्हारा साथ ये हीं है, वहीं हैं, जो हर रोज हर घड़ी हर पल चाहिए... इस दुनिया मे अस्तित्व नहीं है मेरा,  जीने को तो यूहीं जिए जा रहा हूँ मैं... मेरी दुनिया मेरी जिंदगी सब तुम हो,  सच तुमसे मिलने को मरा जा रहा हूँ मैं... मैं रेगिस्तान में भटकता हूँ, मृत हूँ, ...

जी-भर कर अभी देखा नहीं हैं। लोकेश शर्मा।

दीदार भी हैं तो सिर्फ तेरा ही, इन आंखों का कोई और ख़ुदा नहीं हैं।  यूँ तो कई बार तुझको देखा हैं मैंने,  फिर भी जी-भर कर अभी देखा नहीं हैं। तू साथ हैं मेरे मेरी जिन्दगी में,  फिर मुझे किसी चीज़ की कमी नहीं हैं।  मैं चाहूँ तुझे कितना भी पा लूँ, तू वो प्यास हैं जो कभी बुझती नहीं हैं। ~ लोकेश शर्मा। 

आपका जन्मदिन है, क्या कुछ मैं करूँ? लोकेश शर्मा।

मैं डूबा था सोच में ना जाने कब से, क्या कुछ और मांगू अब अपने रब से? ये रंग बिरंगी शाम है ये टिमटिमाते तारे, क्यूँ ना जाने फिर भी लगते है फिके सारे? दीपक रोशन जला ऊँ या चांद को बुलाऊँ, किस तरह आज शाम महफ़िल को सजाऊँ? ये दिन जो आज है मेरे बहुत ही खास है, कैसे शुक्रिया करू  कि आप मेरे पास है? तोहफा दिल दे दूँ, खुशियो का दामन भरूँ, आपका जन्मदिन है क्या कुछ मैं करूँ? ~लोकेश शर्मा।

अगर होता है तो हो जाने दो। लोकेश शर्मा।

सर्द रात है नशीला समा , जाना कहाँ है सब है पता... ना जाने तो इन्तेज़ार कैसा ?   तुम समझ चुके हो और , हम समझ चुके है जिसको... उस पर अब सवाल कैसा ?   आज ना रोको खुदको मुझको अगर होता है तो हो जाने दो... खामखा दिल पर आड़ कैसा ?   ज़माने से अलग हैं हम , हमें दुनिया से वास्ता नही... बेमतलब फिर बवाल कैसा ? ~ लोकेश शर्मा ।

पता नहीं क्यों? लोकेश शर्मा I

पता  नहीं  क्यों, अब तेरे साथ बात, वो बात  नहीं  होती। होती थी जो शाम, वो शाम  नहीं  होती। वो छोटी-मोटी मजाक, वो थोड़ी-सी छेड़छाड़। होती थी जो खास, वो मुलाकात  नहीं  होती। जब चोट लगती थी मुझे, तो जान जाती थी तेरी, होती थी जो मेरी फिक्र, वो फिक्र अब नहीं होती। अब तेरी मेरी मंजिल, वो मंजिल नहीं होती। होती थी जो राह एक, वो भी अब एक नहीं होती। कहाँ क्या बदल गया, जो सब कुछ बदल गया। क्यूँ मेरे आने की खुशी, वो बहार अब नहीं होती। पता  नहीं  क्यों... ~ लोकेश शर्माI

इतने क्यूँ अंजान बन रहे हों। लोकेश शर्मा।

इतने क्यूँ अंजान बन रहे हों,  चाहत ही तो हैं, दिखा दो । हम तो याद करते ही हैं,  तुम भी याद करते हो, बता दो । यूँ तो आँखों से इशारे भी,  करते हैं बहुत कुछ बयां । लेकिन कुछ बातों के लिए तो, लफ्ज़ो को होंठों पे  भी  सजा लो।  ~लोकेश शर्मा।

आज कुछ लिखने की कोशिश की है मैंने। लोकेश शर्मा।

आज कुछ लिखने की कोशिश की है मैंने, अपनी हालत शब्दों में सरेआम की है मैंने। कुछ अपने आप से, कुछ कलम कागज़ से, कुछ आप से कहने की कोशिश की है मैंने। जो कभी किसी से बयां नहीं कर सका वो, लिख कर हालात खुल कर बात की है मैंने। अंदर ही अंदर बंद था किसी कैद में कब से, उस बंदी दिल की बेड़ियां आज़ाद की है मैंने। सुन सको तो सुनना, समझ सको तो समझना, यहां बहुत कुछ कहने की कोशिश की है मैंने। ~लोकेश शर्मा।

आ इन हसीन लम्हों में। Love Status।

  आ इन हसीन लम्हों में, थोड़ी-सी मिठास भर दें। थोड़ा-सा मैं तुझे चख लूं, थोड़ा-सा तू मुझे चख लें। ~लोकेश शर्मा। 

नया साल हैं, नयी बात करते हैं। लोकेश शर्मा।

नया साल हैं , नयी बात करते हैं । जो बीता बीते साल उस से सीख कर , कठिन जिंदगी को थोड़ा आसान करते हैं , कि पुरानी हार तो अब हो गई पुरानी , नया मुकाम और नया प्रयास करते हैं । जो कुछ रह गई अनसुलझी पहेलियाँ , नये साल में उनका ये सुझाव करते हैं , कि ईर्ष्या मनमुटाव घमंड दर्द उदासी , सबको भूलाकर दिल में खुशी भरते हैं ।   बीती बातें , बीते मतभेद अब छोड़ो भी , अपने पराये सब साथ मिलकर रहते हैं , कि कुछ गलतियां आप मेरी भूल जाओ , कुछ गलतियां हम आपकी माफ करते हैं । नया साल हैं ,  नयी बात करते हैं । ~लोकेश शर्मा।

अब जो साथ तू नहीं तो फिर मैं नहीं। लोकेश शर्मा।

  तेरा बीच राह मुझे यूँ छोड़ जाना तेरे लिए खेल है तो फिर खेल वहीं... जितना प्यार किया तेरे लिए शायद कम रहा मेरी तू रही नहीं तो फिर ना सही... मैं तो पूरा का पूरा तेरा ही सिर्फ तेरा ही था तुझे काफी नहीं तो फिर ना सही... तुने तेरी दुनिया एक बार फिर से बदली है वो अब मैं नहीं तो फिर कोई और सही... मेरी दुनिया का तो तुझे पता ही है ना अब जो साथ तू नहीं तो फिर मैं नहीं... ~लोकेश शर्मा ।

न फिर कभी। लोकेश शर्मा।

हाँ मेरी कुछ बाते है ऐसी, जो शायद तुम्हे अच्छी न लगे। पर आज न कह सका, तो न कह सकूँगा फिर कभी। तुम जा तो रही हो छोड़कर, रोकूंगा नही तुम्हें अब। पर वादा है मेरा तुमसे, अब न मिलूंगा तुम्हें फिर कभी। चाहे दुख में ही दिन गुजरे, या फिर रो कर कटे रात। न होगा तुम्हारा इंतज़ार, न करूँगा अभिनंदन फिर कभी। जब कभी अकेला लगेगा, तब याद जरूर आएगी। पर साथ देने तुम्हारे, अब न आऊँगा मैं फिर कभी। ~लोकेश शर्मा।

मेरी नींदें उड़ा कर, वो चैन से सो गई। लोकेश शर्मा।

मेरी नींदें उड़ा कर , वो चैन से सो गई। सब कुछ तो किया था , न जाने कहाँ कमी रह गई। अब तो दिन-रात , सब एक-सी हो गई । रात को बारिश की बूँदें , दिन   में उनकी नमी रह गई। ~लोकेश शर्मा।

तुझे पता है, तू मेरी जान है। लोकेश शर्मा।

तुझे पता है, तू मेरी जान है, तुझे दुखी कैसे रख सकता हूँ। तू अगर खुश रह ले तो मैं, बेजान भी खुश रह सकता हूँ। ~लोकेश शर्मा।

मगर तुझे तो भुला भी नही सकता। लोकेश शर्मा।

खुश रहने की बहुत इच्छा है, मगर खुश रह भी नही सकता। जोर से रोने का मन कर रहा है, मगर खुल कर रो भी नही सकता। तुझ पर बहुत गुस्सा आ रहा है, मगर गुस्सा कर भी नही सकता। बहुत कुछ मुझे बताना है तुझे, मगर अब बता भी नही सकता। मेरा सब कुछ दूर चला गया है, मगर मैं कुछ कर भी नही सकता। मिलने को तो कोई और मिल जाये, मगर तुझे तो भुला भी नही सकता। ~लोकेश शर्मा। Views:

राखी। रक्षाबंधन। लोकेश शर्मा।

सावन में जब राखी आती , बहन भाई की खुशियाँ लाती। कुमकुम का तिलक लगाती , भाई को वो मिठाई खिलाती। अटूट-प्रेम रिश्ते का वो बंधन , भाई की कलाई पर है बांधती। तोहफे में क्या लाया उसके , बहन भाई से पूछती जाती। तोहफा पाकर खुश हो जाती , मंगल कामना करती जाती। बहन की प्रार्थना राखी को , सब दुःख दर्द दूर कर जाती। ~ लोकेश शर्मा।

Happy Independence Day.🇮🇳। स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं।

न हिन्दू हूँ न मुस्लिम हूँ , मैं न सिख न ईसाई हूँ , शान हूँ हिंदुस्तान की , मैं हिंदुस्तानी सिपाही हूँ। ~ लोकेश शर्मा। "Not a Hindu, Not a Muslim, Not a Sikh or Christian, My country is India, And I am a soldier Indian" ~LHS

दोस्ती। Happy Friendship day। लोकेश शर्मा।

खून का नही दिल का रिश्ता है , हम जो आपस मे निभा रहे है। एक दूसरे से प्यार है इतना की , एक दूसरे पर जान लुटा रहे है। जहाँ अपने नही वहाँ दोस्त सही , दुनिया में जो जीना सीखा रहे है। दोस्ती प्यार का अपार सागर है , कृष्ण सुदामा भी ये बता रहे है। भगवान खुद भी प्यासे है उसके , जो रिश्ता हम दिल से निभा रहे है। ~लोकेश शर्मा।