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Showing posts with the label Love

न जाने क्यों तुमने इसे प्यार करने की ख़्वाहिश की है।। लोकेश शर्मा।

ये दिल शीशे की तरह टूट कर बिखरा हुआ था,  न जाने क्यों तुमने इसे समेटने की कोशिश की है। एक एक टूकड़े को हाथों से उठाकर चोट खाई,  न जाने क्यों तुमने इसे जोड़ने की एहतिमाम की है। इसमें अब पहले जैसी धड़कन नहीं होगी कभी, न जाने क्यों तुमने इसे धड़काने की गुज़ारिश की है। ये जो धड़क भी जाये तो प्यार ना होगा इससे, न जाने क्यों तुमने इसे प्यार करने की ख़्वाहिश की है। ~ लोकेश शर्मा।

मुझे मेरी जिंदगी हर रोज चाहिए। लोकेश शर्मा।

(माना कीं हम रोज नहीं मिलते, लेकिन जब भी मिलते हैं, मुझे मेरी जिंदगी मिल जाती हैं...) मुझे मेरी जिंदगी हर रोज चाहिए...   ये मेरी तरफ उठती निगाहें, जैसे सुबह की हो पहली किरण... ये हसना तुम्हारा, ये मीठी बातें, जैसे पहाड़ो से झरनों की हो जल तरंग... कभी चुप हो जाना और शर्मा जाना, गालो पर शाम की लालिमा आना... यूँ तेरा जुल्फों को बिखरा देना, दिन को पलभर में रात बना देना... ये धूप, ये छाव और ये रंगीन बहार, कुछ और नहीं है, सब है तेरे मिजाज़... ये रात, ये सूरज, ये चाँद और चाँदनी, कुछ और नहीं है, सब है तेरे प्रभाग... ये हवा, ये बारिश, फूल और खुशबु, क्या कुछ नहीं है जो तुझमें समाया... ये मौसम, ये धरती, आसमाँ खूब नहीं,  कि रब ने तुझे क्या बखूब है बनाया... सबके पास दुनिया खूब है, सही है, पर मुझे मेरी दुनिया बखूब चाहिए... मेरा तुम्हारा साथ ये हीं है, वहीं हैं, जो हर रोज हर घड़ी हर पल चाहिए... इस दुनिया मे अस्तित्व नहीं है मेरा,  जीने को तो यूहीं जिए जा रहा हूँ मैं... मेरी दुनिया मेरी जिंदगी सब तुम हो,  सच तुमसे मिलने को मरा जा रहा हूँ मैं... मैं रेगिस्तान में भटकता हूँ, मृत हूँ, ...

जी-भर कर अभी देखा नहीं हैं। लोकेश शर्मा।

दीदार भी हैं तो सिर्फ तेरा ही, इन आंखों का कोई और ख़ुदा नहीं हैं।  यूँ तो कई बार तुझको देखा हैं मैंने,  फिर भी जी-भर कर अभी देखा नहीं हैं। तू साथ हैं मेरे मेरी जिन्दगी में,  फिर मुझे किसी चीज़ की कमी नहीं हैं।  मैं चाहूँ तुझे कितना भी पा लूँ, तू वो प्यास हैं जो कभी बुझती नहीं हैं। ~ लोकेश शर्मा। 

आपका जन्मदिन है, क्या कुछ मैं करूँ? लोकेश शर्मा।

मैं डूबा था सोच में ना जाने कब से, क्या कुछ और मांगू अब अपने रब से? ये रंग बिरंगी शाम है ये टिमटिमाते तारे, क्यूँ ना जाने फिर भी लगते है फिके सारे? दीपक रोशन जला ऊँ या चांद को बुलाऊँ, किस तरह आज शाम महफ़िल को सजाऊँ? ये दिन जो आज है मेरे बहुत ही खास है, कैसे शुक्रिया करू  कि आप मेरे पास है? तोहफा दिल दे दूँ, खुशियो का दामन भरूँ, आपका जन्मदिन है क्या कुछ मैं करूँ? ~लोकेश शर्मा।

अगर होता है तो हो जाने दो। लोकेश शर्मा।

सर्द रात है नशीला समा , जाना कहाँ है सब है पता... ना जाने तो इन्तेज़ार कैसा ?   तुम समझ चुके हो और , हम समझ चुके है जिसको... उस पर अब सवाल कैसा ?   आज ना रोको खुदको मुझको अगर होता है तो हो जाने दो... खामखा दिल पर आड़ कैसा ?   ज़माने से अलग हैं हम , हमें दुनिया से वास्ता नही... बेमतलब फिर बवाल कैसा ? ~ लोकेश शर्मा ।

एक शख्स की तलाश। लोकेश शर्मा।

दर दर भटकता रहा, उस एक शख्स की तलाश में... सुकून बैचैन दिल को, मिल सके जिस की आगोश में... जो टूट कर वफ़ा करे, जो सिर्फ मेरी ही दुआ करे... तन्हा खामोश मुझे पाए, तो मेरी ख़ामोशी पढ़ सके... वैसे तो कई लोग मिले, कईयों ने बदला रास्ता मेरा... न मिल सका तो एक वो, जो शख्स हो मुझसे ज्यादा मेरा... हर किसी ने छोड़ा मुझे, अपनी जरुरत पूरी होने के बाद... मुझे वो शख्स चाहिए, जो मेरा रहे मेरा होने के बाद... जिसे डर हो मुझे खोने का, एहसास हो मुझे उसके होने का... उस शख्स की तलाश में, जिसे घमंड हो मेरे साथ होने का... अब तलाश हुई है पूरी, एक तुम्हारे आ जाने से मेरी... पाकर तुम्हे ऐसा लगा, तुम दिल की जरुरत हो मेरी... दर दर भटकता रहा, बस एक तुम्हारी ही तलाश में... सुकून बैचैन दिल को, मिला बस तुम्हारी ही आगोश में... ~लोकेश शर्मा।

इतने क्यूँ अंजान बन रहे हों। लोकेश शर्मा।

इतने क्यूँ अंजान बन रहे हों,  चाहत ही तो हैं, दिखा दो । हम तो याद करते ही हैं,  तुम भी याद करते हो, बता दो । यूँ तो आँखों से इशारे भी,  करते हैं बहुत कुछ बयां । लेकिन कुछ बातों के लिए तो, लफ्ज़ो को होंठों पे  भी  सजा लो।  ~लोकेश शर्मा।

आ इन हसीन लम्हों में। Love Status।

  आ इन हसीन लम्हों में, थोड़ी-सी मिठास भर दें। थोड़ा-सा मैं तुझे चख लूं, थोड़ा-सा तू मुझे चख लें। ~लोकेश शर्मा। 

अब जो साथ तू नहीं तो फिर मैं नहीं। लोकेश शर्मा।

  तेरा बीच राह मुझे यूँ छोड़ जाना तेरे लिए खेल है तो फिर खेल वहीं... जितना प्यार किया तेरे लिए शायद कम रहा मेरी तू रही नहीं तो फिर ना सही... मैं तो पूरा का पूरा तेरा ही सिर्फ तेरा ही था तुझे काफी नहीं तो फिर ना सही... तुने तेरी दुनिया एक बार फिर से बदली है वो अब मैं नहीं तो फिर कोई और सही... मेरी दुनिया का तो तुझे पता ही है ना अब जो साथ तू नहीं तो फिर मैं नहीं... ~लोकेश शर्मा ।

क्यूँ मान लूँ मैं। लोकेश शर्मा।

क्यूँ मान लूँ मैं। हमारे दरमियाँ कभी , कि कुछ था ही नही , हमने एक दूसरे को , कि कभी चाहा ही नही। तुम भी वाक़िफ़ हो , मैं भी वाक़िफ़ हूँ , ये रिश्ता सच है जिसे , कि तू अब मानता ही नही। प्यार तो था और है भी , मुझे तुमसे , तुम्हें मुझसे। तो क्यूँ झूठ बोलूँ मैं , कि  हम  अब कुछ भी नही। जो तुम्हें पसंद नही , वो बात करेंगें   भी नही। पर झुठला दूँ प्यार को , ऐसा तो हम करेंगें ही नही। टूट कर चाहा हैं हमने , दोनो ही बिखरने लगे है। तो क्यूँ मान लूँ मैं , कि हम अब साथ ही नही। तुम चाहे कह दो हमे , कि तुम अब कुछ भी नही। तो क्यूँ मान लूँ मैं , कि जो कहा वो झूठ ही नही। ~ लोकेश शर्मा।

न फिर कभी। लोकेश शर्मा।

हाँ मेरी कुछ बाते है ऐसी, जो शायद तुम्हे अच्छी न लगे। पर आज न कह सका, तो न कह सकूँगा फिर कभी। तुम जा तो रही हो छोड़कर, रोकूंगा नही तुम्हें अब। पर वादा है मेरा तुमसे, अब न मिलूंगा तुम्हें फिर कभी। चाहे दुख में ही दिन गुजरे, या फिर रो कर कटे रात। न होगा तुम्हारा इंतज़ार, न करूँगा अभिनंदन फिर कभी। जब कभी अकेला लगेगा, तब याद जरूर आएगी। पर साथ देने तुम्हारे, अब न आऊँगा मैं फिर कभी। ~लोकेश शर्मा।

मैं वहीं पर खड़ा तुमको मिल जाऊँगा। डा. विष्णु सक्सेना।

मैं वहीं पर खड़ा तुमको मिल जाऊँगा जिस जगह जाओगे तुम मुझे छोड़ कर। अश्क पी लूँगा और ग़म उठा लूँगा मैं सारी यादों को सो जाऊंगा ओढ़ कर ।। जब भी बारिश की बूंदें भिगोयें तुम्हें सोच लेना की मैं रो रहा हूँ कहीं। जब भी हो जाओ बेचैन ये मानना खोल कर आँख में सो रहा हूँ कहीं। टूट कर कोई केसे बिखरता यहाँ देख लेना कोई आइना तोड़ कर। मैं वहीं पर खड़ा तुमको....... रास्ते मे कोई तुमको पत्थर मिले पूछना कैसे जिन्दा रहे आज तक। वो कहेगा ज़माने ने दी ठोकरें जाने कितने ही ताने सहे आज तक। भूल पाता नहीं उम्रभर दर्द जब कोई जाता है अपनो से मुंह मोड़ कर। मैं वहीं पर खड़ा तुमको...... मैं तो जब जब नदी के किनारे गया मेरा लहरों ने तन तर बतर कर दिया। पार हो जाऊँगा पूरी उम्मीद थी उठती लहरों ने पर मन में डर भर दिया। रेत पर बेठ कर जो बनाया था घर आ गया हूँ उसे आज फिर तोड़ कर। मैं वहीं पर खड़ा तुमको....... ~ डा. विष्णु सक्सेना ।

मेरी नींदें उड़ा कर, वो चैन से सो गई। लोकेश शर्मा।

मेरी नींदें उड़ा कर , वो चैन से सो गई। सब कुछ तो किया था , न जाने कहाँ कमी रह गई। अब तो दिन-रात , सब एक-सी हो गई । रात को बारिश की बूँदें , दिन   में उनकी नमी रह गई। ~लोकेश शर्मा।

तुझे पता है, तू मेरी जान है। लोकेश शर्मा।

तुझे पता है, तू मेरी जान है, तुझे दुखी कैसे रख सकता हूँ। तू अगर खुश रह ले तो मैं, बेजान भी खुश रह सकता हूँ। ~लोकेश शर्मा।

मगर तुझे तो भुला भी नही सकता। लोकेश शर्मा।

खुश रहने की बहुत इच्छा है, मगर खुश रह भी नही सकता। जोर से रोने का मन कर रहा है, मगर खुल कर रो भी नही सकता। तुझ पर बहुत गुस्सा आ रहा है, मगर गुस्सा कर भी नही सकता। बहुत कुछ मुझे बताना है तुझे, मगर अब बता भी नही सकता। मेरा सब कुछ दूर चला गया है, मगर मैं कुछ कर भी नही सकता। मिलने को तो कोई और मिल जाये, मगर तुझे तो भुला भी नही सकता। ~लोकेश शर्मा। Views:

वो तुम नही थी। लोकेश शर्मा।

वो लड़की मुझे दिखी, जो किसी से बात कर रही थी। वो ही काला टॉप और, हल्के ग्रे कलर की जीन्स पहनी थी। बाल थे उसके खुले खुले, मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी। फिर बात खत्म कर वो, उस जगह से आगे चल पड़ी थी। काला छोटा बैग लटका था, और चलने की स्टाइल भी वही थी। ---1--- मैं भी दौड़ने लगा उसके पीछे, मिलूंगा आज उस से, खुशी बड़ी थी। मेरी उत्साहित ज़बान ने उसे, दौड़ते-दौड़ते पीछे आवाज भी दी थी। सुना नही होगा शायद उसने, वो आवाज सुन पीछे नही मुड़ी थी। मैंने हाथ उसका फिर पकड़ा, रोका उसे, वो मेरे सामने खड़ी थी। मैं चेहरा देख चौक गया था, जिसे तुम था समझा, वो तुम नही थी। ---2--- उसने देखा मुझे और फिर, 'क्या हुआ बोलिए' वो सवाल पूछी थी। कोई और समझ लिया आपको, माफ करना मुझे, जो गलती हुई थी। ये कहकर बस देखता रहा, सब कुछ वैसा ही, पर वो तुम नही थी। मिलना था तुमसे दुबारा, ये ख्वाइश न जाने क्यूँ अधूरी थी। फिर मन ही मन में रोता रहा, आखिर क्यों वो जो थी, वो तुम नही थी। 😔😔😔 ---3--- ~लोकेश शर्मा। Thank you Ram Kumar Prajapati, Vandana Sharm...

क्या तुम्हे है ये याद? । लोकेश शर्मा ।

°क्या तुम्हे है ये याद? वो देर रात, फ़ोन पर बात, यूँ मुझे बुलाना तेरे पास। हाथो में हाथ, साथ साथ, टहलना फिर सुनसान रात। और वो रात तेरी, हर हसीन रात, हर घड़ी, पल बस तेरा साथ। आंखों से आंखे, हाथो से हाथ, यूँ पेंच लड़ाते हम करते बात। फिर चिपक जाना एक दूजे के साथ, फिर क्या होंठ और क्या गाल। गले मिल, सुनना दिल का हाल, बस महसूस करना, रहना शांत। पर अब देर रात, फ़ोन पर बात, यूँ न आ पाना अब तेरे पास, हाथो में न अब हाथ साथ, अकेले अकेले अब सुनसान रात। ~लोकेश शर्मा। views:

मुझे आज भी यकीन नही होता। लोकेश शर्मा।

° मुझे आज भी यकीन नहीं होता... कि कैसे कोई जाने किस पल , किसी का दीवाना बन जाता है। भूलकर असली दुनिया सारी , अलग ही दुनिया में खो जाता है। कि कैसे कोई कल का अनजान , आज किसी की जान हो जाता है। खुद की जान से भी बढ़कर , उस जान से प्यार हो जाता है। मुझे आज भी यकीन नहीं होता... कि कैसे कोई महफ़िल में भी , सब में अकेला कर जाता है। सब कुछ पास होते हुए भी , कमी का अहसास हो जाता है। कि कैसे कोई एक उसका , सब कुछ उसका बन जाता है। अपनो से भी रिश्ता सिर्फ वो , उस एक के लिए तोड़ जाता है। मुझे आज भी यकीन नहीं होता... कि कैसे कोई जीवन अपना , सिर्फ उस एक नाम कर जाता है। एक ही तो जीवन है , और उसे भी वो बर्बाद कर जाता है। कि कैसे कोई प्यार के घाट यूँ , बंद आंखों से उतर जाता है। न वो उसमें डूब पाता है , न उभर कर कभी वापस आता है। मुझे आज भी यकीन नहीं होता... ~ लोकेश शर्मा।

आखिरी खत, प्यार को।

प्यार,             जानता हूँ, मैं जानता हूँ की काफी समय बीत गया है। काफी समय बीत गया है, हमे एक दुसरे से अलग हुए, पर मैं आज भी उन पुरानी यादों में खोया रहता हूँ। वो यादें जो कभी मेरे जीवन में खुशियों की रोशनी हुआ करती थी, वो आज मुझे कई घंटे उदास रखती है।               क्या तुम खुश हो, मेरे बिना? शायद हो लेकिन मैं नहीं।              कल रात तुम्हारे लिखे हुए पुराने खत पढ़ रहा था, “मैं तुमसे मिलने से पहले तक ये नहीं जानती थी की प्यार क्या होता है? पर अब जानती हूँ। तुम मेरे लिए सब कुछ हो। अगर भगवान भी स्वयं हमे अलग करने की कोशिश करे तो वो भी हमे एक दुसरे से अलग नहीं कर पायेगा।” ऐसी कई बातें है, जो उनमे लिखी थी, आज जिनका कोई अर्थ नहीं है। पता नहीं ये बातें सच भी थी या नहीं, या फिर किसी और के लिए बदल गई है।             वो रात जब हम आखिरी बार मिले थे, वो रात जब मेरा वस्तिकता से सामना हुआ। जब तुमने मुझ ...