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आ इन हसीन लम्हों में। Love Status।

  आ इन हसीन लम्हों में, थोड़ी-सी मिठास भर दें। थोड़ा-सा मैं तुझे चख लूं, थोड़ा-सा तू मुझे चख लें। ~लोकेश शर्मा। 
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टूटते रिश्ते टूटते सपने। उत्कर्ष जैन।

इन बिखरते बिगड़ते रिश्तों के दरमियान,  एक आशियां मैं बसाना चाहता था। उसमे एक उम्मीद थी,  कि ढांचा एक दिन घर बनेगा। और प्यारा सा कुटुम्ब फिर,  उसमे सदा निवास करेगा। उसकी नींव में एक विश्वास था,  पानी सा बहाव था। मिट्टी में प्यार था और  पत्थर सा संकल्प था। इमारत पर इमारत चढ़ती गयी,  आकांक्षाएँ मेरी बढ़ती गयी। सोचा था अब नजदीक है पल,  साथ रहेंगे फिर हर प्रहर। पर क्या पता था  कि ऊंचाई तक पहुंचने पर,  कुछ रिश्ते छूट जायेंगे। जिनका मतलब पूरा हो गया,  वो यूँ किनारा कर जायेंगे और  अंखियों के वो कुटुंब के सपने,  अधूरे ही रह जायेंगे। मतलब का ये संसार है,  काम है तो परिवार है। रिश्तों की परवाह रही नहीं,  स्वयं के सिवा कोई दिखता नहीं। यही तो वो सच्चाई थी,  जो मैंने देखी नहीं। बस सपना था एक कुटुंब का मेरा,  फिलहाल वो पूरा हुआ नहीं। माना इस बार मैं विफल रहा,  पर प्रयास अनवरत रहेगा। आशियाने का वो स्वप्न मेरा,  पूरा अवश्य होकर रहेगा। - उत्कर्ष जैन।

पता नहीं क्यों? लोकेश शर्मा I

पता  नहीं  क्यों, अब तेरे साथ बात, वो बात  नहीं  होती। होती थी जो शाम, वो शाम  नहीं  होती। वो छोटी-मोटी मजाक, वो थोड़ी-सी छेड़छाड़। होती थी जो खास, वो मुलाकात  नहीं  होती। जब चोट लगती थी मुझे, तो जान जाती थी तेरी, होती थी जो मेरी फिक्र, वो फिक्र अब नहीं होती। अब तेरी मेरी मंजिल, वो मंजिल नहीं होती। होती थी जो राह एक, वो भी अब एक नहीं होती। कहाँ क्या बदल गया, जो सब कुछ बदल गया। क्यूँ मेरे आने की खुशी, वो बहार अब नहीं होती। पता  नहीं  क्यों... ~ लोकेश शर्माI

इतने क्यूँ अंजान बन रहे हों। लोकेश शर्मा।

इतने क्यूँ अंजान बन रहे हों,  चाहत ही तो हैं, दिखा दो । हम तो याद करते ही हैं,  तुम भी याद करते हो, बता दो । यूँ तो आँखों से इशारे भी,  करते हैं बहुत कुछ बयां । लेकिन कुछ बातों के लिए तो, लफ्ज़ो को होंठों पे  भी  सजा लो।  ~लोकेश शर्मा।

आज कुछ लिखने की कोशिश की है मैंने। लोकेश शर्मा।

आज कुछ लिखने की कोशिश की है मैंने, अपनी हालत शब्दों में सरेआम की है मैंने। कुछ अपने आप से, कुछ कलम कागज़ से, कुछ आप से कहने की कोशिश की है मैंने। जो कभी किसी से बयां नहीं कर सका वो, लिख कर हालात खुल कर बात की है मैंने। अंदर ही अंदर बंद था किसी कैद में कब से, उस बंदी दिल की बेड़ियां आज़ाद की है मैंने। सुन सको तो सुनना, समझ सको तो समझना, यहां बहुत कुछ कहने की कोशिश की है मैंने। ~लोकेश शर्मा।

नया साल हैं, नयी बात करते हैं। लोकेश शर्मा।

  नया साल हैं , नयी बात करते हैं । जो बीता बीते साल उस से सीख कर , कठिन जिंदगी को थोड़ा आसान करते हैं , कि पुरानी हार तो अब हो गई पुरानी , नया मुकाम और नया प्रयास करते हैं । जो कुछ रह गई अनसुलझी पहेलियाँ , नये साल में उनका ये सुझाव करते हैं , कि ईर्ष्या मनमुटाव घमंड दर्द उदासी , सबको भूलाकर दिल में खुशी भरते हैं ।   बीती बातें , बीते मतभेद अब छोड़ो भी , अपने पराये सब साथ मिलकर रहते हैं , कि कुछ गलतियां आप मेरी भूल जाओ , कुछ गलतियां हम आपकी माफ करते हैं । नया साल हैं ,  नयी बात करते हैं । ~लोकेश शर्मा।

अब जो साथ तू नहीं तो फिर मैं नहीं। लोकेश शर्मा।

  तेरा बीच राह मुझे यूँ छोड़ जाना तेरे लिए खेल है तो फिर खेल वहीं... जितना प्यार किया तेरे लिए शायद कम रहा मेरी तू रही नहीं तो फिर ना सही... मैं तो पूरा का पूरा तेरा ही सिर्फ तेरा ही था तुझे काफी नहीं तो फिर ना सही... तुने तेरी दुनिया एक बार फिर से बदली है वो अब मैं नहीं तो फिर कोई और सही... मेरी दुनिया का तो तुझे पता ही है ना अब जो साथ तू नहीं तो फिर मैं नहीं... ~लोकेश शर्मा ।