शब्द। लोकेश शर्मा। July 18, 2018 वक़्त बेवक़्त बोलते बहुत है, ये शब्द दबे राज खोलते बहुत है। सजते संवरते हैं साफ पन्नों पर, पढ़ते ही दिल मे उतरते बहुत है। कभी हँसाते है, कभी रुलाते है, Read more