सर्द रात है नशीला समा , जाना कहाँ है सब है पता... ना जाने तो इन्तेज़ार कैसा ? तुम समझ चुके हो और , हम समझ चुके है जिसको... उस पर अब सवाल कैसा ? आज ना रोको खुदको मुझको अगर होता है तो हो जाने दो... खामखा दिल पर आड़ कैसा ? ज़माने से अलग हैं हम , हमें दुनिया से वास्ता नही... बेमतलब फिर बवाल कैसा ? ~ लोकेश शर्मा ।
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