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वो तुम नही थी। लोकेश शर्मा।

वो लड़की मुझे दिखी, जो किसी से बात कर रही थी। वो ही काला टॉप और, हल्के ग्रे कलर की जीन्स पहनी थी। बाल थे उसके खुले खुले, मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी। फिर बात खत्म कर वो, उस जगह से आगे चल पड़ी थी। काला छोटा बैग लटका था, और चलने की स्टाइल भी वही थी। ---1--- मैं भी दौड़ने लगा उसके पीछे, मिलूंगा आज उस से, खुशी बड़ी थी। मेरी उत्साहित ज़बान ने उसे, दौड़ते-दौड़ते पीछे आवाज भी दी थी। सुना नही होगा शायद उसने, वो आवाज सुन पीछे नही मुड़ी थी। मैंने हाथ उसका फिर पकड़ा, रोका उसे, वो मेरे सामने खड़ी थी। मैं चेहरा देख चौक गया था, जिसे तुम था समझा, वो तुम नही थी। ---2--- उसने देखा मुझे और फिर, 'क्या हुआ बोलिए' वो सवाल पूछी थी। कोई और समझ लिया आपको, माफ करना मुझे, जो गलती हुई थी। ये कहकर बस देखता रहा, सब कुछ वैसा ही, पर वो तुम नही थी। मिलना था तुमसे दुबारा, ये ख्वाइश न जाने क्यूँ अधूरी थी। फिर मन ही मन में रोता रहा, आखिर क्यों वो जो थी, वो तुम नही थी। 😔😔😔 ---3--- ~लोकेश शर्मा। Thank you Ram Kumar Prajapati, Vandana Sharm...

क्या तुम्हे है ये याद? । लोकेश शर्मा ।

°क्या तुम्हे है ये याद? वो देर रात, फ़ोन पर बात, यूँ मुझे बुलाना तेरे पास। हाथो में हाथ, साथ साथ, टहलना फिर सुनसान रात। और वो रात तेरी, हर हसीन रात, हर घड़ी, पल बस तेरा साथ। आंखों से आंखे, हाथो से हाथ, यूँ पेंच लड़ाते हम करते बात। फिर चिपक जाना एक दूजे के साथ, फिर क्या होंठ और क्या गाल। गले मिल, सुनना दिल का हाल, बस महसूस करना, रहना शांत। पर अब देर रात, फ़ोन पर बात, यूँ न आ पाना अब तेरे पास, हाथो में न अब हाथ साथ, अकेले अकेले अब सुनसान रात। ~लोकेश शर्मा। views:

वो बाते, हिंदी कविता। wo baate hindi poem.

बातो ही बातो में कभी कभी, उन बातो की याद आ जाती है, जिन बातो को खुद से न कभी, याद करने की बात होती है। शब्दो ही शब्दो में दबी दबी, दिल की आह बन आ जाती है,, कविताओं के शब्दो में दबी, फिर एक पहचान बनी होती है। कुछ न कुछ बहुत कमी कमी, मुझसे जब ये भी दूर हो जाती है, खलती है मुझे जिसकी कमी, उसकी उसमे याद बसी होती है। ~लोकेश शर्मा। LHS

पल पल उस पल की याद दिलाता है। लोकेश शर्मा।

पल पल उस पल की याद दिलाता है, जिस पल एक दूसरे को पल भर देखा था। कल कल रोज़ एक कल समय दिखलाता है, न वो कल आता न वो आता दिखता था। क्या क्या करते क्या कुछ हो जाता है,