बहुत समय बाद तुझे देखा आज, दिल ने कहा ठहर जा थोड़ा, और कर ले थोड़ी उस से बात। दिमाग ने लगाया थप्पड़ तब दिल को, और याद आ गयी सारी वो पुरानी बात। कैसे क्या क्या हुआ था जब,
बातो ही बातो में कभी कभी, उन बातो की याद आ जाती है, जिन बातो को खुद से न कभी, याद करने की बात होती है। शब्दो ही शब्दो में दबी दबी, दिल की आह बन आ जाती है,, कविताओं के शब्दो में दबी, फिर एक पहचान बनी होती है। कुछ न कुछ बहुत कमी कमी, मुझसे जब ये भी दूर हो जाती है, खलती है मुझे जिसकी कमी, उसकी उसमे याद बसी होती है। ~लोकेश शर्मा। LHS
देखो एक बात है जो मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ, न जाने कब से तुम्हें समझाना चाहता हूँ। रुक रुक कर सोचता हूँ कि अब बता भी देता हूँ, पर जब सामने होती हो तो अंदर छुपा भी लेता हूँ । दिल कहता है बोल दे, दिमाग कहता जरा सोच ले, हिम्मत तो है मुझमें पर तुम्हें खोने से मैं डरता हूँ ।