इस दुनिया में दोस्त ढूँढ रहा हूँ।
मन अशांत है थोड़ा, इसका वही समाधान खोज रहा हूँ,
जो बतलाया गया, दिल खोलने का वही ख्याल जोड रहा हूँ।
उन सबकी बात थी, तो उन सबके साथ सदा खड़ा था मैं,
अब जो बारी मेरी आई, तो आने की उनकी राह तक रहा हूँ।
जीवन का एक रिश्ता है, जिनका साथ हो तो सब ठीक है,
दोस्ती है वो रिश्ता, दोस्त है रिश्तेदार उनकी बात कर रहा हूँ।
कुछ और नहीं बस, दोस्तों के साथ की चाय सोच रहा हूँ,
मैं पगला गया हूँ, जो इस दुनिया में वैसे हीं दोस्त ढूँढ रहा हूँ।

Comments
Post a Comment