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अब क्या बताऊँ मैं, कि क्या हाल हैं? लोकेश शर्मा।

अब क्या बताऊँ मैं, कि क्या हाल हैं? सुकून नहीं हैं, सुकून की तलाश हैं, दिन व्यस्त हैं, मेरी रात परेशान हैं। मिलने को बाकी तो सब मिलता हैं , यहाँ सबकी अपनी अपनी दूकान हैं। अब क्या बताऊँ मैं, कि क्या हाल हैं? बाहर से हँसता हैं, अंदर बवाल हैं, कोई पूछे तो बोलता हैं, सब कमाल हैं। हर रोज अपने आप से लड़ता हैं, ये किरदार मेरा खुद एक सवाल हैं। अब क्या बताऊँ मैं, कि क्या हाल हैं? जरुरत को रोटी कपड़ा मकान हैं, बावजूद इसके, मेरा मन अशांत हैं। सख्त चेहरा हैं और झूठी मुस्कान हैं, ये चलता फिरता तन अब बेजान हैं। अब क्या बताऊँ मैं, कि क्या हाल हैं? कल की चोट अभी गई भी नहीं हैं, कि आज फिर मेरा जंग का मैदान हैं। जिनके होने से मेरा जीवन बेहाल हैं, वो भी पूछते हैं, और कवि क्या हाल हैं? अब क्या बताऊँ मैं, कि क्या हाल हैं? ~लोकेश शर्मा।

मैं वहीं पर खड़ा तुमको मिल जाऊँगा। डा. विष्णु सक्सेना।

मैं वहीं पर खड़ा तुमको मिल जाऊँगा जिस जगह जाओगे तुम मुझे छोड़ कर। अश्क पी लूँगा और ग़म उठा लूँगा मैं सारी यादों को सो जाऊंगा ओढ़ कर ।। जब भी बारिश की बूंदें भिगोयें तुम्हें सोच लेना की मैं रो रहा हूँ कहीं। जब भी हो जाओ बेचैन ये मानना खोल कर आँख में सो रहा हूँ कहीं। टूट कर कोई केसे बिखरता यहाँ देख लेना कोई आइना तोड़ कर। मैं वहीं पर खड़ा तुमको....... रास्ते मे कोई तुमको पत्थर मिले पूछना कैसे जिन्दा रहे आज तक। वो कहेगा ज़माने ने दी ठोकरें जाने कितने ही ताने सहे आज तक। भूल पाता नहीं उम्रभर दर्द जब कोई जाता है अपनो से मुंह मोड़ कर। मैं वहीं पर खड़ा तुमको...... मैं तो जब जब नदी के किनारे गया मेरा लहरों ने तन तर बतर कर दिया। पार हो जाऊँगा पूरी उम्मीद थी उठती लहरों ने पर मन में डर भर दिया। रेत पर बेठ कर जो बनाया था घर आ गया हूँ उसे आज फिर तोड़ कर। मैं वहीं पर खड़ा तुमको....... ~ डा. विष्णु सक्सेना ।

मेरी नींदें उड़ा कर, वो चैन से सो गई। लोकेश शर्मा।

मेरी नींदें उड़ा कर , वो चैन से सो गई। सब कुछ तो किया था , न जाने कहाँ कमी रह गई। अब तो दिन-रात , सब एक-सी हो गई । रात को बारिश की बूँदें , दिन   में उनकी नमी रह गई। ~लोकेश शर्मा।

तुझे पता है, तू मेरी जान है। लोकेश शर्मा।

तुझे पता है, तू मेरी जान है, तुझे दुखी कैसे रख सकता हूँ। तू अगर खुश रह ले तो मैं, बेजान भी खुश रह सकता हूँ। ~लोकेश शर्मा।

मगर तुझे तो भुला भी नही सकता। लोकेश शर्मा।

खुश रहने की बहुत इच्छा है, मगर खुश रह भी नही सकता। जोर से रोने का मन कर रहा है, मगर खुल कर रो भी नही सकता। तुझ पर बहुत गुस्सा आ रहा है, मगर गुस्सा कर भी नही सकता। बहुत कुछ मुझे बताना है तुझे, मगर अब बता भी नही सकता। मेरा सब कुछ दूर चला गया है, मगर मैं कुछ कर भी नही सकता। मिलने को तो कोई और मिल जाये, मगर तुझे तो भुला भी नही सकता। ~लोकेश शर्मा। Views:

पीयूष मिश्रा की कुछ कविताएं। पीयूष मिश्रा।

Includes :- One Night Stand... क्या नखरा है यार... कुछ इश्क किया कुछ काम किया। कौन किसको क्या पता... अरे, जाना कहां है...? °One Night Stand... खत्म हो चुकी है जान, रात ये करार की, वो देख रोशनी ने इल्तिज़ा ये बार बार की। जो रात थी तो बात थी, जो रात ही चली गयी, तो बात भी वो रात ही के साथ ही चली गयी। तलाश भी नही रही, सवेरे मकाम की, अंधेरे के निशान की, अंधेरे के गुमान की। याद है तो बस मुझे, वो होंठ की चुभन तेरी, याद है तो बस मुझे, वो सांस की छुअन तेरी। वो सिसकियों के दौर की महक ये बची हुई, वो और, और, और की, देहक ये बची हुई। ये ठीक ही हुआ...

वो तुम नही थी। लोकेश शर्मा।

वो लड़की मुझे दिखी, जो किसी से बात कर रही थी। वो ही काला टॉप और, हल्के ग्रे कलर की जीन्स पहनी थी। बाल थे उसके खुले खुले, मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी। फिर बात खत्म कर वो, उस जगह से आगे चल पड़ी थी। काला छोटा बैग लटका था, और चलने की स्टाइल भी वही थी। ---1--- मैं भी दौड़ने लगा उसके पीछे, मिलूंगा आज उस से, खुशी बड़ी थी। मेरी उत्साहित ज़बान ने उसे, दौड़ते-दौड़ते पीछे आवाज भी दी थी। सुना नही होगा शायद उसने, वो आवाज सुन पीछे नही मुड़ी थी। मैंने हाथ उसका फिर पकड़ा, रोका उसे, वो मेरे सामने खड़ी थी। मैं चेहरा देख चौक गया था, जिसे तुम था समझा, वो तुम नही थी। ---2--- उसने देखा मुझे और फिर, 'क्या हुआ बोलिए' वो सवाल पूछी थी। कोई और समझ लिया आपको, माफ करना मुझे, जो गलती हुई थी। ये कहकर बस देखता रहा, सब कुछ वैसा ही, पर वो तुम नही थी। मिलना था तुमसे दुबारा, ये ख्वाइश न जाने क्यूँ अधूरी थी। फिर मन ही मन में रोता रहा, आखिर क्यों वो जो थी, वो तुम नही थी। 😔😔😔 ---3--- ~लोकेश शर्मा। Thank you Ram Kumar Prajapati, Vandana Sharm...